संविधान दिवस पर सीएम योगी की दो टूक: ‘कर्तव्य भूलने पर कमजोर होता है लोकतंत्र’
संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का संविधान केवल अधिकारों का भंडार नहीं, बल्कि कर्तव्यों के निर्वहन का एक पवित्र ग्रंथ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब कोई नागरिक अपने कर्तव्यों को भूलकर केवल अधिकारों की मांग करता है, तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होने लगती हैं। मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि कर्तव्यों के बिना अधिकार सुरक्षित नहीं रह सकते।
लोक भवन सभागार में संविधान की उद्देशिका का सामूहिक शपथ ग्रहण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया को याद करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान निर्माताओं ने दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन की अथक मेहनत से दुनिया का सबसे समावेशी संविधान तैयार किया। उन्होंने कहा कि इसका अनादर करना, बाबा साहब और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान का अपमान है। मुख्यमंत्री ने दुख व्यक्त किया कि आजादी की पीड़ा को न झेल पाने वाली युवा पीढ़ी स्वतंत्रता के वास्तविक मूल्य को समझने में कहीं न कहीं चूक रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में संविधान दिवस मनाना शुरू किया, ताकि देशवासियों को मूल संवैधानिक मूल्यों से पुनः जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराते हुए नागरिकों से पंच-प्रण अपनाने की अपील की। इन पंच-प्रण में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना, भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखना, नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करना और वर्दीधारी बलों का सम्मान करना शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी से किया गया कार्य ही संविधान का सच्चा सम्मान है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छात्रों का समय पर पढ़ना, शिक्षकों का निष्ठापूर्वक पढ़ाना, व्यापारियों का निष्पक्ष व्यापार करना और सरकारी कर्मचारियों का फाइलों का समय पर निपटारा करना ही संविधान की सच्ची सेवा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतना संविधान और राष्ट्र दोनों का अनादर है।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक सौहार्द पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा या क्षेत्र के नाम पर विद्वेष फैलाना भारत को कमजोर करने का एक षड्यंत्र है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनमें हर पांच परिवारों में से एक परिवार ने प्रदेश के विकास के लिए अपना रोडमैप प्रस्तुत किया है। सरकार उत्कृष्ट सुझाव देने वालों को जिला और प्रदेश स्तर पर सम्मानित भी करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर ग्राम, वार्ड और जनपद ही आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करेंगे। संविधान दिवस पर उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं, बाबा साहब आंबेडकर को नमन किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
इससे पूर्व, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग संविधान विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं या लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास करते हैं, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने संविधान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वहीं, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि संविधान हमें जितने अधिकार प्रदान करता है, उतने ही महत्वपूर्ण कर्तव्य भी सौंपता है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से संविधान में निहित समानता, भाईचारे और कानून के शासन जैसे मूल्यों का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को संविधान का सबसे बड़ा सम्मान बताया।
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