21 करोड़ की साइबर ठगी: आरोपी की जमानत याचिका खारिज
गौ-सेवा ट्रस्ट के नाम पर लगभग 21 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी के एक बड़े मामले में आरोपी इमरान की जमानत याचिका को विशेष न्यायाधीश ब्रह्मतेज चतुर्वेदी की अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार किया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मुकेश बाबू गोस्वामी ने अदालत को बताया कि शिव गौरा गौ-सेवा ट्रस्ट के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक की कैंट शाखा में खोले गए चालू खातों में चार अलग-अलग तारीखों में करीब 21 करोड़ रुपये जमा हुए थे। बैंक ने इन खातों से बड़ी रकम निकाले जाने के बाद शेष राशि को होल्ड पर डाल दिया था और इसकी सूचना साइबर थाने को दी थी।
साइबर थाने द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई कि इन खातों के संबंध में देश के विभिन्न राज्यों में 100 से अधिक साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। यह एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसमें आरोपी इमरान की भूमिका एक सह-अभियुक्त के तौर पर पाई गई है।
अभियोजन पक्ष ने न्यायाधीश को अवगत कराया कि इस मामले की विवेचना अभी जारी है। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि एक सह-अभियुक्त नौशाद ने दूसरे सह-अभियुक्त अभिषेक के खाते में धनराशि स्थानांतरित की थी। इसके बाद, अभिषेक ने गैंग के सदस्य इमरान के खाते में 7 सितंबर 2025 को दस-दस हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की थी।
अदालत में यह दलील दी गई कि यदि आरोपी इमरान को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो इस गंभीर नेटवर्क से संबंधित चल रही विवेचना प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को ठिकाने लगाने और साइबर अपराध से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की भी आशंका है।
इन तमाम दलीलों और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, विशेष न्यायाधीश ब्रह्मतेज चतुर्वेदी ने आरोपी इमरान की जमानत याचिका को खारिज करने का आदेश दिया है। यह फैसला साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत देता है।
