प्रदूषण से त्रस्त दिल्ली-एनसीआर: 37% लोग छोड़ रहे शहर, स्वास्थ्य और जेब पर भारी मार
दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना अब लग्जरी बनता जा रहा है। एक ताजा अध्ययन के अनुसार, जहरीला स्मॉग न केवल लोगों के स्वास्थ्य, बल्कि उनकी जेब और भविष्य को भी प्रभावित कर रहा है। दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के 4,000 लोगों पर किए गए इस सर्वेक्षण ने वायु प्रदूषण की भयावह तस्वीर पेश की है।
सर्वेक्षण में शामिल 80 प्रतिशत से अधिक लोगों ने लगातार स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की है, जिनमें पुरानी खांसी, अत्यधिक थकान और प्रदूषित हवा के कारण गले में जलन शामिल हैं। पिछले वर्ष 68.3 प्रतिशत लोगों ने प्रदूषण से संबंधित बीमारियों के लिए चिकित्सकीय सहायता ली थी, जो इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट को दर्शाता है।
प्रदूषण के कारण लोगों ने बाहरी गतिविधियों में काफी कमी ला दी है, जिससे उनके घर एक तरह की वर्चुअल जेल बन गए हैं। परिवार जहरीले स्मॉग से बचने के लिए घरों के अंदर ही सिमट कर रह गए हैं।
सर्वेक्षण के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, 79.8 प्रतिशत लोग दिल्ली-एनसीआर छोड़ने की सोच रहे हैं या पहले ही छोड़ चुके हैं। इनमें से 33.6 प्रतिशत लोग गंभीरता से शिफ्ट होने की योजना बना रहे हैं, जबकि 31 प्रतिशत सक्रिय रूप से इस पर विचार कर रहे हैं और 15.2 प्रतिशत लोग पहले ही पलायन कर चुके हैं। कुल 37 प्रतिशत लोगों ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, जैसे कि दूसरे शहरों में प्रॉपर्टी की तलाश करना, स्कूलों के बारे में पूछताछ करना या घर छोड़ने का निर्णय लेना। लोग मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों, कम प्रदूषण वाले छोटे शहरों या दिल्ली-एनसीआर के बाहर उन जगहों को पसंद कर रहे हैं जहां उन्हें लगातार अपने ब्रीदिंग ऐप पर AQI की निगरानी न करनी पड़े।
प्रदूषण ने मध्यम वर्ग के परिवारों पर वित्तीय बोझ भी डाला है। 85.3 प्रतिशत लोगों ने प्रदूषण के कारण घर के खर्चों में वृद्धि की बात कही है, जबकि 41.6 प्रतिशत को गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अध्ययन के अनुसार, लंबे समय से खराब वायु गुणवत्ता दैनिक जीवन को बदल रही है। इसका प्रभाव स्वास्थ्य व्यवहार, खर्च करने के तरीकों और रहने के दीर्घकालिक निर्णयों पर पड़ रहा है। यह अब केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है, जिसके लिए तत्काल और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में AQI का स्तर खतरनाक बना हुआ है, जिससे रोहिणी जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं।
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