हैदराबाद में खुला भारत का पहला एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसिंग हब, 15 अरब डॉलर की बचत का अनुमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हैदराबाद में सफ्रान की नई एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसेज इंडिया (एसएईएसआइ) इकाई का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक सुविधा जीएमआर एयरोस्पेस एंड इंडस्ट्रियल पार्क में स्थित है और इसे भारत में विमानों के इंजन की मरम्मत के लिए पहला बड़ा केंद्र माना जा रहा है। लगभग 1,300 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश से 45 हजार वर्ग मीटर में फैली यह इकाई, सालाना 300 एलईएपी इंजनों की सर्विसिंग करने की क्षमता रखती है।
इस सुविधा का मुख्य उद्देश्य भारत को विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान में, भारत का लगभग 85 प्रतिशत एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल) संबंधी कार्य देश के बाहर होता है, जिससे लागत बढ़ती है और विमानों के लंबे समय तक खड़े रहने की समस्या उत्पन्न होती है। नई इकाई के संचालन से इस स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है, जिससे आने वाले वर्षों में 15 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकेगी। यह इकाई एयरबस ए320 नियो और बोइंग 737 मैक्स जैसे विमानों में इस्तेमाल होने वाले एलईएपी इंजनों की मरम्मत करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह इकाई आत्मनिर्भर और सक्षम भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर दिया कि यह भारत को एक ग्लोबल एमआरओ हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार ने वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए अर्थव्यवस्था के दरवाजे खोले हैं, फंडामेंटल्स को मजबूत किया है और व्यापार को आसान बनाया है, जिससे 100 प्रतिशत एफडीआई ऑटोमैटिक रूप से संभव है।
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने भी इस परियोजना के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि ग्लोबल एमआरओ हब बनकर भारत आने वाले वर्षों में 15 अरब डॉलर तक की बचत कर सकता है। यह कदम न केवल विदेशी मुद्रा बचाएगा बल्कि उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा, जिससे भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने में मदद मिलेगी। इस इकाई के 2035 तक पूरी परिचालन क्षमता हासिल कर लेने पर एक हजार से अधिक भारतीय तकनीशियनों और इंजीनियरों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
